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सच्चा दिल -11-Jun-2024

प्रतियोगिता हेतु 
दिनांक: 11/06/2024
सच्चा दिल

तुम मुझे चाहते हो
अपना मानते हो
सच कह रहे हो ना?
या यूंही...
 मेरे साथ हंसी कर रहे हो?
देखो!
मैं बहुत संजीदा हूं 
क्योंकि 
तुम्हें चाहने लगी हूं।
अपना मानने लगी हूं।
तुम्हारे साथ 
अपने ख्वाबो को,, मैं 
सजाने लगी हूं।
इस दिल को ना कभी 
बेवफा कहना 
क्योंकि 
यह दिल सच्चा है 
पानी की तरह साफ है।
इस दिल में रंग तुम्हारा 
रहेगा हमेशा।।

शाहाना परवीन 'शान'...✍️ 

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2 Comments

VIJAY POKHARNA "यस"

14-Jun-2024 08:22 AM

बहुत सुंदर रचना 👍👍

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Anjali korde

12-Jun-2024 09:19 AM

Amazing

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